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Katha Upanishad (Kathopanishad) 1.8
आशाप्रतीक्षे संगतं सूनृतां च इष्टापूर्ते पुत्रपशूंश्च सर्वान् । एतद्वृङ्क्ते पुरुषस्याल्पमेधसो यस्यानश्नन्वसति ब्राह्मणो गृहे ॥ ८ ॥
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उपनिषद मन्त्र संख्या 8 का आध्यात्मिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
मन्दबुद्धि पुरुषकी ज्ञात और अज्ञात वस्तुओंकी प्राप्तिकी इच्छाएँ,
उनके संयोगसे प्राप्त होनेवाले फल, प्रिय वाणीसे होनेवाले फल,
यागादि इष्ट एवं उद्यानादि पूर्त कर्मोंके फल तथा समस्त पुत्र और
पशु आदिको वह नष्ट कर देता है ॥ ८ ॥