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Katha Upanishad (Kathopanishad) 5.6
हन्त त इदं प्रवक्ष्यामि गुह्यं ब्रह्म सनातनम्। यथा च मरणं प्राप्य आत्मा भवति गौतम॥ ६॥
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उपनिषद मन्त्र संख्या 6 का आध्यात्मिक रहस्य