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Katha Upanishad (Kathopanishad) 6.15
यदा सर्वे प्रभिद्यन्ते हृदयस्येह ग्रन्थयः । अथ मर्त्योऽमृतो भवत्येतावद्ध्यनुशासनम् ॥ १५ ॥
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
छेदन हो जाता है उस समय यह मरणधर्मा अमर हो जाता है। बस
सम्पूर्ण वेदान्तोंका इतना ही आदेश है ॥ १५ ॥