Popular:

केनोपनिषद् • खण्ड 3, मन्त्र 6

Kena Upanishad • सामवेद (Samaveda - Talavakara Brahmana)

केनोपनिषद् • खण्ड 3 • मन्त्र 6

Kena Upanishad 3.6

Mantra: 3.6 [Kenopanishad_3.6]

तस्मै तृणं निदधावेतद्दहेति । तदुपप्रेयाय सर्वजवेन तन्न शशाक दग्धुं स तत एव निववृते नैतदशकं विज्ञातुं यदेतद्यक्षमिति ॥ ६॥

卐

HinduText AI से इस उपनिषद मन्त्र का ब्रह्मज्ञान समझें

उपनिषद मन्त्र संख्या 6 का आध्यात्मिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

ऐसा समझ कर यक्ष ने अग्निदेव के सामने एक तिनका रखा और कहा कि इसे जला! अग्निदेव पूरे वेग से उसके पास गए परन्तु अपनी सारी शक्ति लगा कर भी उसको न जला सके और वहीं से लौट कर देवताओं के समक्ष बोले कि - मैं इसको न जान सका कि यह यक्ष कौन है। ॥६॥
卐 HinduText AI