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केनोपनिषद् • खण्ड 3, मन्त्र 5

Kena Upanishad • सामवेद (Samaveda - Talavakara Brahmana)

केनोपनिषद् • खण्ड 3 • मन्त्र 5

Kena Upanishad 3.5

Mantra: 3.5 [Kenopanishad_3.5]

तस्मिँस्त्वयि किं वीर्यमित्यपीदँ सर्वंदहेयं यदिदं पृथिव्यामिति ॥५॥

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उपनिषद मन्त्र संख्या 5 का आध्यात्मिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

यक्ष ने पूछा: अच्छा! तुझ में क्या शक्ति है? अग्नि ने कहा कि पृथ्वी की सम्पूर्ण चीजों को मैं जला सकता हूँ, मेरे अन्दर यह शक्ति है। ॥५॥
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