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Kena Upanishad 3.4
तदभ्यद्रवत्तमभ्यवदत्कोऽसीत्यग्निर्वा अहमस्मीत्यब्रवीज्जातवेदा वा अहमस्मीति ॥ ४॥
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उपनिषद मन्त्र संख्या 4 का आध्यात्मिक रहस्य