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10.3.15
यथा॒ वाते॑न॒ प्रक्षी॑णा वृ॒क्षाः शेरे॒ न्यर्पिताः । ए॒वा स॒पत्नां॒स्त्वं मम॒ प्र क्षि॑णीहि॒ न्यर्पय । पूर्वा॑ञ्जा॒ताँ उ॒ताप॑रान्वर॒णस्त्वा॒भि र॑क्षतु ॥ (१५)
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अथर्ववेद मन्त्र 10.3.15 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
सूखे हुए वृक्ष जिस प्रकार वायु के कारण गिर जाते हैं, उसी प्रकार हे मणि! तुम मेरे पूर्ववर्ती एवं बाद में होने वाले शत्रुओं का विनाश कर के मेरी रक्षा करो. (१५)
EN English Translation
Just as dried trees fall due to air, so o gem! Protect me by destroying my past and later enemies. (15)