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अथर्ववेद

Kanda 10 • Sukta 3 • Mantra 16

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 10 • सूक्त 3 • मन्त्र 16

10.3.16

Mantra ID: 10.3.16

तांस्त्वं प्र च्छि॑न्द्धि वरण पु॒रा दि॒ष्टात्पु॒रायु॑षः । य ए॑नं प॒शुषु॒ दिप्स॑न्ति॒ ये चा॑स्य राष्ट्रदि॒प्सवः॑ ॥ (१६)

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अथर्ववेद मन्त्र 10.3.16 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे वरण वृक्ष से निर्मित मणि! जो इस यजमान के पशुओं एवं राष्ट्र का अपहरण करना चाहते हैं, तू उन के भाग्य और आयु को उन से छीन कर उन्हे नष्ट कर दे. (१६)

EN English Translation

O gem made from the tree! Those who want to kidnap the animals and nation of this host, you should take away their fate and age from them and destroy them. (16)

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