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अथर्ववेद

Kanda 10 • Sukta 6 • Mantra 17

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 10 • सूक्त 6 • मन्त्र 17

10.6.17

Mantra ID: 10.6.17

यमब॑ध्ना॒द्बृह॒स्पति॒र्वाता॑य म॒णिमा॒शवे॑ । तमि॒मं दे॒वता॑ म॒णिं प्रत्य॑मुञ्चन्त श॒म्भुव॑म् । स आ॑भ्यो॒ विश्व॒मिद्दु॑हे॒ भूयो॑भूयः॒ श्वःश्व॒स्तेन॒ त्वं द्वि॑ष॒तो ज॑हि ॥ (१७)

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अथर्ववेद मन्त्र 10.6.17 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

बृहस्पति ने वायु के समान वेग प्राप्त करने के लिए जिस मणि को बांधा, देवों ने उसी सुखदायी मणि को मुझे दिया है. इस मणि ने देवों के लिए बारबार और प्रतिदिन सत्य प्रदान किया है. हे यजमान! इस मणि की सहायता से तू अपने शत्रुओं का विनाश कर. (१७)

EN English Translation

The gem that Jupiter tied to get the same velocity as air, the gods have given me the same happy gem. This gem has provided truth for the gods again and again and every day. O host! With the help of this gem, destroy your enemies. (17)

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