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अथर्ववेद

Kanda 10 • Sukta 7 • Mantra 27

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 10 • सूक्त 7 • मन्त्र 27

10.7.27

Mantra ID: 10.7.27

यस्य॒ त्रय॑स्त्रिंशद्दे॒वा अङ्गे॒ गात्रा॑ विभेजि॒रे । तान्वै त्रय॑स्त्रिंशद्दे॒वानेके॑ ब्रह्म॒विदो॑ विदुः ॥ (२७)

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अथर्ववेद मन्त्र 10.7.27 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जिस के शरीर के अवयवों में तैंतीस देवता अलगअलग निवास करते हैं, उन तैंतीस देवों को केवल वे ही जानते हैं जो ब्रह्म के ज्ञाता हैं. (२७)

EN English Translation

In whose body parts thirty-three gods reside separately, only those thirty-three gods know those who are the knowers of Brahman. (27)

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