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अथर्ववेद

Kanda 10 • Sukta 9 • Mantra 17

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 10 • सूक्त 9 • मन्त्र 17

10.9.17

Mantra ID: 10.9.17

यस्ते॑ प्ला॒शिर्यो व॑नि॒ष्ठुर्यौ कु॒क्षी यच्च॒ चर्म॑ ते । आ॒मिक्षां॑ दुह्रतां दा॒त्रे क्षी॒रं स॒र्पिरथो॒ मधु॑ ॥ (१७)

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अथर्ववेद मन्त्र 10.9.17 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे शतौदना गौ! तेरी जो तिल्ली, गुदा, दोनों आंखें और तेरा चमङड़ा है, ये सब तेरे दानदाता को सदा दही, मीठा दूध और घी देते रहें. (१७)

EN English Translation

O Shataudana Gau! May your spleen, anus, both eyes and your skin always give curd, sweet milk and ghee to your donor. (17)

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