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अथर्ववेद

Kanda 10 • Sukta 9 • Mantra 21

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 10 • सूक्त 9 • मन्त्र 21

10.9.21

Mantra ID: 10.9.21

यौ त॑ उ॒रू अ॑ष्ठी॒वन्तौ॒ ये श्रोणी॒ या च॑ ते भ॒सत् । आ॒मिक्षां॑ दुह्रतां दा॒त्रे क्षी॒रं स॒र्पिरथो॒ मधु॑ ॥ (२१)

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अथर्ववेद मन्त्र 10.9.21 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे शतौदना गी! तेरे पैर, तेरे घुटने, तेरे कूल्हे और प्रजनन अंग सदा तेरे दानदाता को दही, मीठा दूध और घी देते रहें. (२१)

EN English Translation

O shatabana gi! May your feet, your knees, your hips and reproductive organs always give curd, sweet milk and ghee to your donor. (21)

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