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अथर्ववेद

Kanda 11 • Sukta 10 • Mantra 17

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 11 • सूक्त 10 • मन्त्र 17

11.10.17

Mantra ID: 11.10.17

सर्वे॑ दे॒वा उपा॑शिक्ष॒न्तद॑जानाद्व॒धूः स॒ती । ई॒शा वश॑स्य॒ या जा॒या सास्मि॒न्वर्ण॒माभ॑रत् ॥ (१७)

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अथर्ववेद मन्त्र 11.10.17 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

सभी देवों ने समीप में शक्तिशाली होने की इच्छा की. परमेश्वर के साथ विवाह करने वाली माया ने देवों के द्वारा बनाए हुए उस शरीर को जाना. जो माया सारे संसार का नियंत्रण करने वाली है, उस ने इस शरीर में रंग भरा है. (१७)

EN English Translation

Maya, who married God, came to know the body created by the gods. Maya, which is going to control the whole world, has added color to this body. (17)

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