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अथर्ववेद

Kanda 11 • Sukta 11 • Mantra 25

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 11 • सूक्त 11 • मन्त्र 25

11.11.25

Mantra ID: 11.11.25

ई॒शां वो॑ म॒रुतो॑ दे॒व आ॑दि॒त्यो ब्रह्म॑ण॒स्पतिः॑ । ई॒शां व॒ इन्द्र॑श्चा॒ग्निश्च॑ धा॒ता मि॒त्रः प्र॒जाप॑तिः । ई॒शां व॒ ऋष॑यश्चक्रुर॒मित्रे॑षु समी॒क्षय॑न्रदि॒ते अ॑र्बुदे॒ तव॑ ॥ (२५)

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अथर्ववेद मन्त्र 11.11.25 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे शत्रुओ! मरुत देव और ब्रह्मणस्पति तुम्हारे शिक्षक हों. इंद्र, अग्नि, धाता, मित्र और प्रजापति तुम्हारा नियंत्रण करने वाले हों. हे अर्बुदि नाम के सर्प! तुम्हारे द्वारा हमारे शत्रुओं को काटे जाने पर ऋषिगण उन्हें देखते हुए उन के शिक्षक बनें. (२५)

EN English Translation

O enemies! May Marut Dev and Brahmanspati be your teachers. Indra, Agni, Dhata, Mitra and Prajapati should be your control. O serpent named Arbudi! When your enemies are cut off, the sages should look at them and become their teachers. (25)

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