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अथर्ववेद

Kanda 11 • Sukta 12 • Mantra 22

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 11 • सूक्त 12 • मन्त्र 22

11.12.22

Mantra ID: 11.12.22

यश्च॑ कव॒ची यश्चा॑कव॒चो॒मित्रो॒ यश्चाज्म॑नि । ज्या॑पा॒शैः क॑वचपा॒शैरज्म॑ना॒भिह॑तः शयाम् ॥ (२२)

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अथर्ववेद मन्त्र 11.12.22 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हमारा जो शत्रु कवच धारण किए है अथवा जो कवच रहित है, हमारे जो शत्रु रथ में बैठे हैं, वे अपनेअपने पाशों से बंधे हुए सो जाएं. (२२)

EN English Translation

Our enemies who are wearing armor or who are without armor, our enemies who are sitting in the chariot, they should sleep tied to their loops. (22)

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