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अथर्ववेद

Kanda 11 • Sukta 6 • Mantra 23

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 11 • सूक्त 6 • मन्त्र 23

11.6.23

Mantra ID: 11.6.23

यो अ॒स्य वि॒श्वज॑न्मन॒ ईशे॒ विश्व॑स्य॒ चेष्ट॑तः । अन्ये॑षु क्षि॒प्रध॑न्वने॒ तस्मै॑ प्राण॒ नमो॑ऽस्तु ते ॥ (२३)

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अथर्ववेद मन्त्र 11.6.23 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जो प्राण नाना रूपों को जन्म देने वाला है, जो इस संसार का स्वामी है तथा नाना प्राणियों के शरीरों में व्याप्त है, उस तीव्रता से व्याप्त होने वाले हे प्राण! तुम्हारे लिए नमस्कार है. (२३)

EN English Translation

The soul that gives birth to various forms, which is the master of this world and pervades the bodies of various beings, is the one who pervades with that intensity, O soul! Hello to you. (23)

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