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अथर्ववेद

Kanda 11 • Sukta 6 • Mantra 24

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 11 • सूक्त 6 • मन्त्र 24

11.6.24

Mantra ID: 11.6.24

यो अ॒स्य स॒र्वज॑न्मन॒ ईशे॒ सर्व॑स्य॒ चेष्ट॑तः । अत॑न्द्रो॒ ब्रह्म॑णा॒ धीरः॑ प्रा॒णो मानु॑ तिष्ठतु ॥ (२४)

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अथर्ववेद मन्त्र 11.6.24 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

वह जगदीश्वर प्राण आलस्य रहित सदा सूर्य के रूप में विचरण करने वाला, ज्ञानवान एवं सर्वव्यापक होने के कारण मेरा अनुवर्तन करे. (२४)

EN English Translation

That Jagdishwar prana should follow me because he is always moving in the form of the sun without laziness, being knowledgeable and omnipresent. (24)

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