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अथर्ववेद

Kanda 11 • Sukta 8 • Mantra 10

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 11 • सूक्त 8 • मन्त्र 10

11.8.10

Mantra ID: 11.8.10

दिवं॑ ब्रूमो॒ नक्ष॑त्राणि॒ भूमिं॑ य॒क्षाणि॒ पर्व॑तान् । स॑मु॒द्रा न॒द्यो वेश॒न्तास्ते नो॑ मुञ्च॒न्त्वंह॑सः ॥ (१०)

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अथर्ववेद मन्त्र 11.8.10 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हम स्वर्ग की, नक्षत्रों अर्थात्‌ तारों की, भूमि की, यक्षों और पर्वतों की स्तुति करते हैं. जो सागर, नदियां और सरोवर हैं, वे हमें पाप से बचाएं. (१०)

EN English Translation

We praise heaven, constellations, stars, land, yakshas and mountains. May the oceans, rivers and lakes save us from sin. (10)

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