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अथर्ववेद

Kanda 11 • Sukta 9 • Mantra 21

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 11 • सूक्त 9 • मन्त्र 21

11.9.21

Mantra ID: 11.9.21

शर्क॑राः॒ सिक॑ता॒ अश्मा॑न॒ ओष॑धयो वी॒रुध॒स्तृणा॑ । अ॒भ्राणि॑ वि॒द्युतो॑ व॒र्षमुच्छि॑ष्टे॒ संश्रि॑ता श्रि॒ता ॥ (२१)

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अथर्ववेद मन्त्र 11.9.21 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

पत्थरों के छोटे टुकड़े, बालू, पत्थर, जड़ीबूटी और फसलें, लताएं, तिनके, मेघ, बिजलियां और वर्षा ये सब यज्ञशेष रूपी ब्रह्म में स्थित हैं. (२१)

EN English Translation

Small pieces of stones, sand, stones, herbs and crops, vines, straws, clouds, bijlis and rain are all located in the Brahman of Yajnashesh. (21)

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