Popular:
अथर्ववेद

Kanda 14 • Sukta 1 • Mantra 45

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 14 • सूक्त 1 • मन्त्र 45

14.1.45

Mantra ID: 14.1.45

याअकृ॑न्त॒न्नव॑य॒न्याश्च॑ तत्नि॒रे या दे॒वीरन्ताँ॑ अ॒भितोऽद॑दन्त । तास्त्वा॑ज॒रसे॒ सं व्य॑य॒न्त्वायु॑ष्मती॒दं परि॑ धत्स्व॒ वासः॑ ॥ (४५)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

अथर्ववेद मन्त्र 14.1.45 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जिन देवियों ने स्वयं सूत काता है, जिन्होंने बुना है, जो ताना तानती हैं तथा चारों ओर अंतिम भागों को ठीक रखती है, वे तुझे वृद्धावस्था तक रहने के लिए चुनें. तू दीर्घ आयु वाली हो कर इन सब को धन्य बना. (४५)

EN English Translation

The goddesses who themselves spun yarn, who have woven, who stretch the warp and keep the last parts right around, choose you to live till old age. You should be blessed with all this by being long-lived. (45)

卐 HinduText AI