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अथर्ववेद

Kanda 15 • Sukta 14 • Mantra 23

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 15 • सूक्त 14 • मन्त्र 23

15.14.23

Mantra ID: 15.14.23

सयत्सर्वा॑नन्तर्दे॒शाननु॒ व्यच॑लत्परमे॒ष्ठीभू॒त्वानु॒व्यचल॒द्ब्रह्मा॑न्ना॒दं कृ॒त्वा ॥ (२३)

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अथर्ववेद मन्त्र 15.14.23 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जब वह सब अंतर्देशों की ओर चला, तब ब्रह्म को अन्नाद बना कर प्रजापति बनाता हुआ चला. (२३)

EN English Translation

When he walked towards all the inlands, he went on to make Brahma an annad and make him Prajapati. (23)

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