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अथर्ववेद

Kanda 15 • Sukta 6 • Mantra 22

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 15 • सूक्त 6 • मन्त्र 22

15.6.22

Mantra ID: 15.6.22

स दिशोऽनु॒व्यचल॒त्तं वि॒राडनु॒ व्यचल॒त्सर्वे॑ च दे॒वाः सर्वा॑श्च दे॒वताः॑ ॥ (२२)

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अथर्ववेद मन्त्र 15.6.22 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

उस ने दिशाओं की ओर गमन किया. विराट्‌, अदिति देव और देवता उस के पीछेपीछे चलने लगे. (२२)

EN English Translation

He moved in directions. Virat, Aditi Dev and Devta followed him. (22)

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