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अथर्ववेद

Kanda 19 • Sukta 34 • Mantra 6

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 19 • सूक्त 34 • मन्त्र 6

19.34.6

Mantra ID: 19.34.6

त्रिष्ट्वा॑ दे॒वा अ॑जनय॒न्निष्ठि॑तं॒ भूम्या॒मधि॑ । तमु॒ त्वाङ्गि॑रा॒ इति॑ ब्राह्म॒णाः पू॒र्व्या वि॑दुः ॥ (६)

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अथर्ववेद मन्त्र 19.34.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

इस समय धरती पर स्थित तुम को इंद्र आदि देवों ने तीन बार उत्पन्न किया था. इस प्रकार के तुम को अंगिरा गोत्रीय ऋषि एवं ब्राह्मण जानते थे. (६)

EN English Translation

At this time, you, located on earth, were born three times by Indra etc. gods. This type of you were known to the Sages and Brahmins of the Angira gotriya. (6)

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