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अथर्ववेद

Kanda 19 • Sukta 39 • Mantra 7

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 19 • सूक्त 39 • मन्त्र 7

19.39.7

Mantra ID: 19.39.7

हि॑र॒ण्ययी॒ नौर॑चर॒द्धिर॑ण्यबन्धना दि॒वि । तत्रा॒मृत॑स्य॒ चक्ष॑णं॒ ततः॒ कुष्ठो॑ अजायत । स कुष्ठो॑ वि॒श्वभे॑षजः सा॒कं सोमे॑न तिष्ठति । त॒क्मानं॒ सर्वं॑ नाशय॒ सर्वा॑श्च यातुधा॒न्यः ॥ (७)

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अथर्ववेद मन्त्र 19.39.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

स्वर्ग में सोने से बनी रस्सी से बंधी हुई सोने की नाव घूमती रहती है. वहां मरणरहित सोम की उत्पत्ति हुई है. उस सोम से कुष्ठ उत्पन्न हुआ है. सभी रोगों की ओषधि यह कुष्ठ सोम के साथ स्थित रहता है. हे कुष्ठ! तुम सभी रोगों और राक्षसियों का विनाश करो. (७)

EN English Translation

In heaven, the gold boat tied to a rope made of gold keeps moving. There is the origin of the deathless Som. Leprosy has originated from that Som. The medicine of all diseases, it is located with leprosy Som. O leprosy! You destroy all diseases and demons. (7)

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