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अथर्ववेद

Kanda 19 • Sukta 6 • Mantra 16

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 19 • सूक्त 6 • मन्त्र 16

19.6.16

Mantra ID: 19.6.16

मू॒र्ध्नो दे॒वस्य॑ बृह॒तो अं॒शवः॑ स॒प्त स॑प्त॒तीः । राज्ञः॒ सोम॑स्याजायन्त जा॒तस्य॒ पुरु॑षा॒दधि॑ ॥ (१६)

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अथर्ववेद मन्त्र 19.6.16 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

उस यज्ञ रूप पुरुष के मस्तक से सोम राजा की चार सौ नब्बे महान शोभा वाली रश्मियां उत्पन्न हुई. (१६)

EN English Translation

From the head of that yajna form man, four hundred and ninety great ornaments of Som Raja were born. (16)

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