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अथर्ववेद

Kanda 2 • Sukta 33 • Mantra 7

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 2 • सूक्त 33 • मन्त्र 7

2.33.7

Mantra ID: 2.33.7

अङ्गेअ॑ङ्गे॒ लोम्नि॑लोम्नि॒ यस्ते॒ पर्व॑णिपर्वणि । यक्ष्मं॑ त्वच॒स्यं॑ ते व॒यं क॒श्यप॑स्य वीब॒र्हेण॒ विष्व॑ञ्चं॒ वि वृ॑हामसि ॥ (७)

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अथर्ववेद मन्त्र 2.33.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे यक्ष्मा रोगी पुरुष! तेरे अंगअंग में, रोमरोम में तथा जोड़जोड़ में जो यक्ष्मा रोग है, उसे मैं कश्यप महर्षि के मंत्रों के सूक्त के द्वारा बाहर निकालता हूं. (७)

EN English Translation

O man with tuberculosis! I take out the tuberculosis disease in your angang, romrom and joint joint, through the sukta of kashyap maharishi's mantras. (7)

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