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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 41 • Mantra 2

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 41 • मन्त्र 2

20.41.2

Mantra ID: 20.41.2

इ॒च्छनश्व॑स्य॒ यच्छिरः॒ पर्व॑ते॒ष्वप॑श्रितम् । तद्वि॑दच्छर्य॒णाव॑ति ॥ (२)

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अथर्ववेद मन्त्र 20.41.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

पर्वतों में छिपे हुए अपने घोड़े का सिर प्राप्त करने के इच्छुक इंद्र ने शर्यणावत में प्राप्त किया था, तब उस का वज्र बना कर उन्होंने असुरों का वध किया था. (२)

EN English Translation

Indra, who wanted to get the head of his horse hidden in the mountains, had received it in Sharyanavat, then he killed the asuras by making a thunderbolt of it. (2)

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