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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 54 • Mantra 1

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 54 • मन्त्र 1

20.54.1

Mantra ID: 20.54.1

विश्वाः॒ पृत॑ना अभि॒भूत॑रं॒ नरं॑ स॒जूस्त॑तक्षु॒रिन्द्रं॑ जज॒नुश्च॑ रा॒जसे॑ । क्रत्वा॒ वरि॑ष्ठं॒ वर॑ आ॒मुरि॑मु॒तोग्रमोजि॑ष्ठं त॒वसं॑ तर॒स्विन॑म् ॥ (१)

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अथर्ववेद मन्त्र 20.54.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

सभी सेनाओं ने शत्रुओं को मूर्च्छित करने वाले इंद्र का वरण किया है. वे इंद्र अत्यधिक शक्तिशाली और उग्र हैं. (१)

EN English Translation

All the armies have chosen Indra, who faints the enemies. That Indra is highly powerful and fierce. (1)

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