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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 61 • Mantra 2

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 61 • मन्त्र 2

20.61.2

Mantra ID: 20.61.2

येन॒ ज्योतीं॑ष्या॒यवे॒ मन॑वे च वि॒वेदि॑थ । म॑न्दा॒नो अ॒स्य ब॒र्हिषो॒ वि रा॑जसि ॥ (२)

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अथर्ववेद मन्त्र 20.61.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! जिस सोमरस के प्रभाव से तुमने आयु और मन को तेज प्राप्त कराया था, उसी सोमरस से पुष्ट हो कर तुम उस यजमान के कुशाओं से बने आसन पर बैठो. (२)

EN English Translation

O Indra! Strengthened by the Somras, which made you gain age and mind sharp, you sit on the seat made of the host's skills. (2)

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