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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 74 • Mantra 2

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 74 • मन्त्र 2

20.74.2

Mantra ID: 20.74.2

शिप्रि॑न्वाजानां पते॒ शची॑व॒स्तव॑ दं॒सना॑ । आ तू न॑ इन्द्र शंसय॒ गोष्वश्वे॑षु शु॒भ्रिषु॑ स॒हस्रे॑षु तुवीमघ ॥ (२)

ॐ

शास्त्र जिज्ञासा: इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

अथर्ववेद मन्त्र 20.74.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

॥ वैदिक संदर्भ ॥

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे धन के स्वामी इंद्र! तुम शत्रुओं को दंड देने में समर्थ हो. तुम अपनी उसी सामर्थ्य को हमारे सहस्रो अश्वों, गायों और शुश्रियों को प्रदान करो. (२)

EN English Translation

O Swami of Wealth Indra! You are capable of punishing enemies. Give the same power to our thousands of horses, cows and shushris. (2)

ॐ शास्त्र जिज्ञासा