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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 77 • Mantra 1

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 77 • मन्त्र 1

20.77.1

Mantra ID: 20.77.1

आ स॒त्यो या॑तु म॒घवाँ॑ ऋजी॒षी द्रव॑न्त्वस्य॒ हर॑य॒ उप॑ नः । तस्मा॒ इदन्धः॑ सुषुमा सु॒दक्ष॑मि॒हाभि॑पि॒त्वं क॑रते गृणा॒नः ॥ (१)

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अथर्ववेद मन्त्र 20.77.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

इंद्र के घोड़े हमारी ओर आएं. धन के स्वामी, सत्य के प्रति निष्ठा रखने वाले एवं सोमपायी इंद्र यहां आगमन करें. स्तुति करने वाला विद्वान्‌ इसी कारण स्नान आदि कर्म कर रहा है तथा हम सोम का संस्कार कर रहे हैं. (१)

EN English Translation

Indra's horses should come towards us. Swami of wealth, those who are loyal to truth and somapayi Indra should come here. The scholar who praises is doing bathing etc. for this reason and we are doing the rites of Soma. (1)

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