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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 92 • Mantra 11

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 92 • मन्त्र 11

20.92.11

Mantra ID: 20.92.11

अतीदु॑ श॒क्र ओ॑हत॒ इन्द्रो॒ विश्वा॒ अति॒ द्विषः॑ । भि॒नत्क॒नीन॑ ओद॒नं प॒च्यमा॑नं प॒रो गि॒रा ॥ (११)

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अथर्ववेद मन्त्र 20.92.11 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

भार को संभालने वाले इंद्र सभी शत्रुओं को वश में करते हैं. मंत्र से पकते हुए ओदन को कठिन होते हुए भी उन्होंने उस का भेदन किया. (११)

EN English Translation

Indra, who handles the load, subdues all the enemies. Despite being difficult for odan to cook with the mantra, he pierced it. (11)

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