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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 94 • Mantra 7

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 94 • मन्त्र 7

20.94.7

Mantra ID: 20.94.7

ए॒वैवापा॒गप॑रे सन्तु दू॒ढ्योश्वा॒ येषां॑ दु॒र्युज॑ आयुयु॒ज्रे । इ॒त्था ये प्रागुप॑रे सन्ति दा॒वने॑ पु॒रूणि॒ यत्र॑ व॒युना॑नि॒ भोज॑ना ॥ (७)

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अथर्ववेद मन्त्र 20.94.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जिन अश्चों को दुर्युज नाम का सारथी रथ में जोड़ता है, वे कभी वृद्ध न हों. जो दाता को बहुत से भोज्य पदार्थों से युक्त बनाते हैं, वे मेघ हैं. (७)

EN English Translation

Those who are joined by a charioteer named Duryuz should never grow old. The clouds are the ones that make the giver rich in many foods. (7)

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