Popular:
अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 95 • Mantra 1

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 95 • मन्त्र 1

20.95.1

Mantra ID: 20.95.1

त्रिक॑द्रुकेषु महि॒षो यवा॑शिरं तुवि॒शुष्म॑स्तृ॒पत्सोम॑मपिब॒द्विष्णु॑ना सु॒तं य॒थाव॑शत् । स ईं॑ ममाद॒ महि॒ कर्म॒ कर्त॑वे म॒हामु॒रुं सैनं॑ सश्चद्दे॒वो दे॒वं स॒त्यमिन्द्रं॑ स॒त्य इन्दुः॑ ॥ (१)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

अथर्ववेद मन्त्र 20.95.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

वे इंद्र त्रिकद्रुक नाम के सोम पात्रों में सोमरस पीते हैं और जौ आदि मिश्रण से तृप्ति प्राप्त करते हैं. इंद्र विष्णु द्वारा तैयार किए गए सोमरस पर अधिकार करते हैं, क्योंकि वह सोमरस उन्हें बल प्रदान करता है और उन में सुसंगत होता है. (१)

EN English Translation

They drink someras in som characters named Indra Trikdruk and get satisfaction from the mixture of barley etc. Indra takes over the Someras prepared by Vishnu, because that Someras gives him strength and is consistent in them. (1)

卐 HinduText AI