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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 96 • Mantra 10

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 96 • मन्त्र 10

20.96.10

Mantra ID: 20.96.10

आहा॑र्ष॒मवि॑दं त्वा॒ पुन॒रागाः॒ पुन॑र्णवः । सर्वा॑ङ्ग॒ सर्वं॑ ते॒ चक्षुः॒ सर्व॒मायु॑श्च तेऽविदम् ॥ (१०)

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अथर्ववेद मन्त्र 20.96.10 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे रोगी पुरुष! तू लौट आ तथा पुनः नव जीवन प्राप्त कर. इस कर्म के द्वारा मैं ने तुझे दर्शन शक्ति तथा पूर्ण आयु देने में सफलता प्राप्त कर ली है. (१०)

EN English Translation

O patient man! Come back and have a new life again. Through this karma, I have succeeded in giving you vision power and full life. (10)

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