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अथर्ववेद

Kanda 4 • Sukta 15 • Mantra 7

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 4 • सूक्त 15 • मन्त्र 7

4.15.7

Mantra ID: 4.15.7

सं वो॑ऽवन्तु सु॒दान॑व॒ उत्सा॑ अजग॒रा उ॒त । म॒रुद्भिः॒ प्रच्यु॑ता मे॒घा वर्ष॑न्तु पृथि॒वीमनु॑ ॥ (७)

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अथर्ववेद मन्त्र 4.15.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे मनुष्यो! शोभन दान वाले मरुत्‌ तुम्हें तृप्त करें. अजगर से भी मोटी जल धाराएं उत्पन्न हों. वायु के द्वारा प्रेरित मेघ पृथ्वी पर वर्षा करें. (७)

EN English Translation

O men! May the graceful donors satisfy you. Thick water streams should be generated from pythons. Rain on the earth induced by the cloud induced by the wind. (7)

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