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अथर्ववेद

Kanda 6 • Sukta 25 • Mantra 3

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 6 • सूक्त 25 • मन्त्र 3

6.25.3

Mantra ID: 6.25.3

नव॑ च॒ या न॑व॒तिश्च॑ सं॒यन्ति॒ स्कन्ध्या॑ अ॒भि । इ॒तस्ताः सर्वा॑ नश्यन्तु वा॒का अ॑प॒चिता॑मिव ॥ (३)

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अथर्ववेद मन्त्र 6.25.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

कंधों की नसों में स्थित निन्यानवे प्रकार की गंडमालाएं कंधों की धमनियों को व्याप्त करती हैं. वे सब इस प्रकार नष्ट हो जाएं, जिस प्रकार पतिव्रता को पा कर सभी दोष नष्ट हो जाते हैं. (३)

EN English Translation

Ninety-nine types of goiter located in the veins of the shoulders pervade the arteries of the shoulders. All of them should be destroyed in such a way that all the defects are destroyed by getting pativrata. (3)

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