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6.43.2
अ॒यं यो भूरि॑मूलः समु॒द्रम॑व॒तिष्ठ॑ति । द॒र्भः पृ॑थि॒व्या उत्थि॑तो मन्यु॒शम॑न उच्यते ॥ (२)
शास्त्र जिज्ञासा: इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें
अथर्ववेद मन्त्र 6.43.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
अधिक जड़ों वाला यह कुश अधिक जल वाले भाग में स्थित है. पृथ्वी पर ऊपर की ओर उठा हुआ कुश क्रोध शांत करने वाला बताया जाता है. (२)
EN English Translation
This kush with more roots is located in the area with more water. Kush, raised upwards on earth, is said to calm anger. (2)