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अथर्ववेद

Kanda 6 • Sukta 60 • Mantra 2

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 6 • सूक्त 60 • मन्त्र 2

6.60.2

Mantra ID: 6.60.2

अश्र॑मदि॒यम॑र्यमन्न॒न्यासां॒ सम॑नं य॒ती । अ॒ङ्गो न्वर्यमन्न॒स्या अ॒न्याः सम॑न॒माय॑ति ॥ (२)

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अथर्ववेद मन्त्र 6.60.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अर्यमा देव! अन्य पतिव्रता नारियों ने पतियों को पाने के उपायों के रूप में शांति पाने के लिए जिन कर्मो को किया था, उन्हें पति की अभिलाषा करने वाली यह कन्या कर चुकी है तथा पति को प्राप्त न करने के कारण दुःखी है. अन्य स्त्रियां इस पतिकामा की शांति के उपाय कर रही हैं. (२)

EN English Translation

O Aryama Dev! The rituals that other pativrata women had done to get peace as a way to get husbands, this girl who desires her husband has done and is sad due to not getting her husband. Other women are taking measures for the peace of this husband. (2)

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