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अथर्ववेद

Kanda 6 • Sukta 77 • Mantra 3

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 6 • सूक्त 77 • मन्त्र 3

6.77.3

Mantra ID: 6.77.3

जात॑वेदो॒ नि व॑र्तय श॒तं ते॑ सन्त्वा॒वृतः॑ । स॒हस्रं॑ त उपा॒वृत॒स्ताभि॑र्नः॒ पुन॒रा कृ॑धि ॥ (३)

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अथर्ववेद मन्त्र 6.77.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे जातवेद अग्नि! इस भागने वाली स्त्री को घर में स्थापित करो. तुम्हारे पास इसे लौटाने के सैकड़ों उपाय हैं. तुम इसे मेरे पास लौटाने के लिए हजारों उपाय जानते हो. उन के द्वारा तुम इस स्त्री को पुनः मेरी ओर आकर्षित करो. (३)

EN English Translation

O jataved agni! Install this running woman in the house. You have hundreds of ways to return it. You know thousands of ways to return it to me. Through them you attract this woman to me again. (3)

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