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अथर्ववेद

Kanda 9 • Sukta 15 • Mantra 20

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 9 • सूक्त 15 • मन्त्र 20

9.15.20

Mantra ID: 9.15.20

सू॑यव॒साद्भग॑वती॒ हि भू॒या अधा॑ व॒यं भग॑वन्तः स्याम । अ॒द्धि तृण॑मघ्न्ये विश्व॒दानीं॒ पिब॑ शु॒द्धमु॑द॒कमा॒चर॑न्ती ॥ (२०)

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अथर्ववेद मन्त्र 9.15.20 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे भूमि! तू जलमय सूर्य के संपर्क के कारण जल रूप ऐश्वर्य को प्राप्त कर सकी. हम भी तेरे जल रूप ऐश्वर्य से संपत्तिशाली बनें. हे हिंसित न होने वाली पृथ्वी! तू मेघों को चूरचूर कर के शुद्ध जल का सेवन कर एवं सूर्य की किरणों के द्वारा जल का सेवन कर. (२०)

EN English Translation

O land! You could achieve the opulence of the water form due to the contact of the watery sun. May we also become rich with your water form opulence. O unspoken earth! You crush the clouds and consume pure water and consume water through the rays of the sun. (20)

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