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अथर्ववेद

Kanda 16 • Sukta 5 • Mantra 4

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 16 • सूक्त 5 • मन्त्र 4

16.5.4

Mantra ID: 16.5.4

वि॒द्म ते॑स्वप्न ज॒नित्रं॒ निरृ॑त्याः पु॒त्रोऽसि॑ य॒मस्य॒ कर॑णः । अन्त॑कोऽसिमृ॒त्युर॑सि । तं त्वा॑ स्वप्न॒ तथा॒ सं वि॑द्म॒ स नः॑ स्वप्नदुः॒ष्वप्न्या॑त्पाहि ॥ (४)

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अथर्ववेद मन्त्र 16.5.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे स्वमन! हम तुम्हारे जन्म को जानते हैं. तुम निर्त्रति अर्थात्‌ पाप देवता के पुत्र हो तथा यम देव के साधन हो. तुम जीवन का अंत करने वाली मृत्यु हो. हम तुम्हारे इस रूप को जानते हैं. तुम हमें बुरे स्वप्र से बचाओ. (४)

EN English Translation

O self- We know your birth. You are the son of Nirtrati i.e. sin god and the instrument of Yama Dev. You are the end-of-life death. We know this form of yours. You save us from bad self-respect. (4)

卐 HinduText AI