Popular:
अथर्ववेद

Kanda 16 • Sukta 5 • Mantra 7

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 16 • सूक्त 5 • मन्त्र 7

16.5.7

Mantra ID: 16.5.7

वि॒द्म ते॑स्वप्न ज॒नित्रं॒ परा॑भूत्याः पु॒त्रोऽसि॑ य॒मस्य॒ कर॑णः । अन्त॑कोऽसिमृ॒त्युर॑सि । तं त्वा॑ स्वप्न॒ तथा॒ सं वि॑द्म॒ स नः॑ स्वप्नदुः॒ष्वप्न्या॑त्पाहि ॥ (७)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

अथर्ववेद मन्त्र 16.5.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे स्वप्र! हम तुम्हारी उत्पत्ति को जानते हैं. तुम पराभूति अर्थात्‌ पराजय के पुत्र और यमराज के साधन हो. तुम यमराज के साधन और मृत्यु हो. हम तुम्हारे स्वरूप को भलीभांति जानते हैं. तुम हमें बुरे स्वप्रों से बचाओ. (७)

EN English Translation

O self- We know your origin. You are the son of parabhuti i.e. defeat and the instrument of Yamraj. You are the instrument and death of Yamraj. We know your nature very well. You save us from evil self-respect. (7)

卐 HinduText AI