Popular:
अथर्ववेद

Kanda 16 • Sukta 8 • Mantra 16

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 16 • सूक्त 8 • मन्त्र 16

16.8.16

Mantra ID: 16.8.16

जि॒तम॒स्माक॒मुद्भि॑न्नम॒स्माक॑मृ॒तम॒स्माकं॒ तेजो॒ऽस्माकं॒ ब्रह्मा॒स्माकं॒स्वर॒स्माकं॑य॒ज्ञो॒ऽस्माकं॑ प॒शवो॒ऽस्माकं॑ प्र॒जा अ॒स्माकं॑ वी॒राअ॒स्माक॑म् । तस्मा॑द॒मुं निर्भ॑जामो॒ऽमुमा॑मुष्याय॒णम॒मुष्याः॑ पु॒त्रम॒सौ यः । सोऽथ॑र्वणां॒ पाशा॒न्मा मो॑चि । तस्येदं वर्च॒स्तेजः॑ प्रा॒णमायु॒र्निवे॑ष्टयामी॒दमे॑नमध॒राञ्चं॑ पादयामि ॥ (१६)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

अथर्ववेद मन्त्र 16.8.16 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

शत्रुओं का वध कर के लाए हुए तथा जीते हुए सभी पदार्थ हमारे हैं. सत्य, तेज, ब्रह्म, स्वर्ग, पशु, संतान और सभी वीर पुरुष हमारे हैं. हम अमुक गोत्र वाले तथा अमुक नाम वाली स्त्री के पुत्र को लोक से दूर करते हैं. वह अथर्वा गोत्र वालों के बंधन से मुक्त न हो. हम उस के तेज, प्राण और आयु को लपेट कर उसे औंधे मुंह गिराते हैं. (१६)

EN English Translation

All the things that have been brought and won by killing enemies are ours. Truth, glory, Brahman, heaven, animals, children and all brave men are ours. We remove the son of a woman with such a tribe and such a name from the world. He should not be free from the bondage of the atharva gotra. We wrap his glory, life and age and drop him face down. (16)

卐 HinduText AI