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अथर्ववेद

Kanda 17 • Sukta 1 • Mantra 30

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 17 • सूक्त 1 • मन्त्र 30

17.1.30

Mantra ID: 17.1.30

अ॒ग्निर्मा॑गो॒प्ता परि॑ पातु वि॒श्वत॑ उ॒द्यन्त्सूर्यो॑ नुदतां मृत्युपा॒शान् । व्यु॒छन्ती॑रु॒षसः॒ पर्व॑ता ध्रु॒वाः स॒हस्रं॑ प्रा॒णा मय्या य॑तन्ताम् ॥ (३०)

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अथर्ववेद मन्त्र 17.1.30 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

अपने आश्रितो के रक्षक अग्नि देव मेरी रक्षा करें. उदय होते हुए सूर्य मृत्यु के पाशों से मेरी रक्षा करें. उषा मृत्यु के पाशों को मुझ से दूर रखें. मैं आयु की कामना करता हूं. मुझ में प्राण स्थित रहें. मेरी इंद्रियां चेष्टा करती रहें. (३०)

EN English Translation

May Agni Dev, the protector of your dependents, protect me. May the rising sun protect me from the loops of death. Usha, keep the loops of death away from me. I wish you all the best. May my soul reside in me. Keep trying my senses. (30)

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