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अथर्ववेद

Kanda 5 • Sukta 17 • Mantra 2

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 5 • सूक्त 17 • मन्त्र 2

5.17.2

Mantra ID: 5.17.2

सोमो॒ राजा॑ प्रथ॒मो ब्र॑ह्मजा॒यां पुनः॒ प्राय॑च्छ॒दहृ॑णीयमानः । अ॑न्वर्ति॒ता वरु॑णो मि॒त्र आ॑सीद॒ग्निर्होता॑ हस्त॒गृह्या नि॑नाय ॥ (२)

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अथर्ववेद मन्त्र 5.17.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

सब से पहले सोम ने ब्रह्म के लिए उस गाय को दे दिया, जिस ने उन्हें उत्पन्न किया था. उस समय वरुण और सूर्य सोम के सहयोगी बने और अग्नि उन के होता थे. (२)

EN English Translation

First of all, Soma gave for Brahman the cow that produced him. At that time Varun and Surya became associates of Som and agni used to belong to them. (2)

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