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अथर्ववेद

Kanda 5 • Sukta 17 • Mantra 7

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 5 • सूक्त 17 • मन्त्र 7

5.17.7

Mantra ID: 5.17.7

ये गर्भा॑ अव॒पद्य॑न्ते॒ जग॒द्यच्चा॑पलु॒प्यते॑ । वी॒रा ये तृ॒ह्यन्ते॑ मि॒थो ब्र॑ह्मजा॒या हि॑नस्ति॒ तान् ॥ (७)

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अथर्ववेद मन्त्र 5.17.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जो गर्भ गिराए जाते हैं, संसार में जो उथलपुथल होती है, वीरों की परस्पर मारकाट, ये सारे कर्म ब्राह्मण की पत्नी ही करती है. (७)

EN English Translation

The wombs that are dropped, the turmoil in the world, the mutual beating of the heroes, all these actions are done by the wife of the Brahmin. (7)

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