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अथर्ववेद

Kanda 5 • Sukta 24 • Mantra 17

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 5 • सूक्त 24 • मन्त्र 17

5.24.17

Mantra ID: 5.24.17

त॒तस्त॑ताम॒हास्ते॑ मावन्तु । अ॒स्मिन्ब्रह्म॑ण्य॒स्मिन्कर्म॑ण्य॒स्यां पु॑रो॒धाया॑म॒स्यां प्र॑ति॒ष्ठाया॑म॒स्यां चित्त्या॑म॒स्यामाकू॑त्याम॒स्यामा॒शिष्य॒स्यां दे॒वहू॑त्यां॒ स्वाहा॑ ॥ (१७)

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अथर्ववेद मन्त्र 5.24.17 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

पितरों के पितामह मेरे इस वेदोक्त पौराहित्य कर्म में, प्रतिष्ठा में, संकल्प में, देवाहवान कर्म में तथा आशीर्वाद रूप कर्म में मेरी रक्षा करें. (१७)

EN English Translation

May the father of the ancestors protect me in this Vedukta paurahitaya karma of mine, in prestige, in resolve, in divine deeds and in action as blessings. (17)

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