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अथर्ववेद

Kanda 5 • Sukta 6 • Mantra 13

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 5 • सूक्त 6 • मन्त्र 13

5.6.13

Mantra ID: 5.6.13

इन्द्र॑स्य॒ वर्मा॑सि । तं त्वा॒ प्र प॑द्ये॒ तं त्वा॒ प्र वि॑शामि॒ सर्व॑गुः॒ सर्व॑पूरुषः॒ सर्वा॑त्मा॒ सर्व॑तनूः स॒ह यन्मेऽस्ति॒ तेन॑ ॥ (१३)

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अथर्ववेद मन्त्र 5.6.13 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अग्नि! तुम इंद्र के कवच, सर्वत्र गमन करने वाले, सब की आत्मा, सब के शरीर और सब के पुरुष हो. मैं अपने समस्त परिवार और पूरी संपत्ति के साथ तुम्हारी शरण में आता हूं. (१३)

EN English Translation

O agni! You are indra's armor, the one who travels everywhere, the soul of all, the body of all and the man of all. I come to your shelter with all my family and entire property. (13)

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