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10.107.6
तमे॒व ऋषिं॒ तमु॑ ब्र॒ह्माण॑माहुर्यज्ञ॒न्यं॑ साम॒गामु॑क्थ॒शास॑म् । स शु॒क्रस्य॑ त॒न्वो॑ वेद ति॒स्रो यः प्र॑थ॒मो दक्षि॑णया र॒राध॑ ॥ (६)
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ऋग्वेद मन्त्र 10.107.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
जो सबसे पहले दक्षिणा देता है, उसीको ऋषि, ब्रह्मा, यज्ञ के नेता सामगानकर्ता एवं स्तोता जानते हैं. वे अग्नि की तीनों मूर्तियों को जानते हैं. (६)
EN English Translation
The one who gives dakshina first of all is known to the sages, Brahma, the leaders of the yagna, the samagankarta and the stota. They know the three statues of agni. (6)